देश की धर्मनिरपेक्षता पर भगवा का चढ़ता रंग

आज मैं कुछ गंभीर सवाल की ओर देश का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं। सच है कि देश में नरेंद्र मोदी जी की सरकार चल रही है। एक समय याद करें जब नरेंद्र मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब तत्कालीन प्रधानमंत्री मान्यवर अटल बिहारी वाजपेई जी गुजरात दंगों पर मोदी सरकार को यह कहते हुए नसीहत दी थी मोदी जी राज्य धर्म बहुत बड़ी चीज होती है। इसीलिए राज्य धर्म का पालन करें। देश के प्रधानमंत्री ने बड़ी बात छोटी अलफाज़ कह दी थी। देश ही नहीं दुनिया में इस बात की चर्चा उस समय जोरों पर थी। समय बदलता गया और भाजपा के पहली पंक्ति के नेता लालकृष्ण आडवाणी जी, मुरली मनोहर जोशी जैसे कद्दावर नेता मोदी जी के कुटनीति के कारण हासिये पर चले गये। आज भाजपा में पहली पंक्ति के नेता अपने को अपमानित महसूस कर रहें हैं। मोदी जी संघवाद की नीति देश पर थोपते जा रहे हैं। आज भारत में रहने वाले हर हिंदुस्तानी के सामने बड़ा सवाल तैर रहा है की क्या मोदी जी के रहते देश के धर्म निरपेक्षता अक्षुण्य रह पायेगा ?
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भारत आज जिस पड़ाव पर खड़ा है जहां सिर्फ भगवा राजनीति को भारतीय मन मसोस कर ग्राह कर रहा है। परंतु कब तक...... आने वाला कल उज्जवल भारत की ओर जाता नहीं दिख रहा है। संविधान की मूल आत्मा जिसे हम धर्मनिरपेक्षता कहते हैं उस पर लगातार हमले हो रहे हैं परंतु मोदी जी की जुमलेबाजी हर बार देश को छलने में कामयाब होते जा रहे हैं। कोई कह रहा है कि गौ हत्या बंद हो परंतु गौर करने वाली बात यह है कि गौ मांस के निर्यात करने वाले ज्यादातर व्यवसायी भाजपा से जुड़े हैं। भाजपा की यह नारा इसीलिए कामयाब होता है कि वह हिंदू-हिंदू की बात करते हैं। हम सब धर्म निरपेक्षता की समाजवादी विचार धारा सनातन धर्म को मानता ही नहीं बल्की अंगीकार करता। परंतु सनातनी फांसीवाद का विरोध करते हैं। 

जब हम भारत निर्माण की बात करते हैं भाजपा भगवा निर्माण की बात कर भी वो कामयाब क्यों होते हैं ? उस रहस्य पर एक नज़र जब हम नहीं देंगे तो देश उसी तरह छलता रहेगा और हम मूक दर्शक बने रहेंगे।

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